प्रयागराज: रंगदारी मांगने के एक मामले में आरोपी अधिवक्ता मोहम्मद जैन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत।
प्रयागराज: रंगदारी मांगने के एक मामले में आरोपी अधिवक्ता मोहम्मद जैन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत।
प्रयागराज, 18 जुलाई ): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रंगदारी मांगने के आरोप में दर्ज एक मुकदमे में आरोपी बनाए गए अधिवक्ता मोहम्मद जैन को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस आदेश के बाद अब अधिवक्ता जैन की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है।
न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की एकल पीठ ने अधिवक्ता मोहम्मद जैन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। प्रयागराज के पुरामुफ्ती थाने में दर्ज इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता और सरकारी वकील की दलीलों को विस्तार से सुना।
मामले का विवरण: मामले के तथ्यों के अनुसार, शिकायतकर्ता माबूद अहमद ने 17 मई 2024 को प्रयागराज के पुरामुफ्ती थाने में एक FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराई थी। इस FIR में अधिवक्ता मोहम्मद जैन के साथ-साथ कुख्यात अतीक अहमद गैंग के सदस्य सिबली, हासिर, अख्तर और अज्ञात चार अन्य व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। शिकायत में इन सभी पर मारपीट करने और 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया था।
अधिवक्ता की दलीलें: अधिवक्ता मोहम्मद जैन की ओर से बहस करते हुए उनके वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल प्रयागराज जिला न्यायालय में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कथित घटना के लगभग आठ दिनों बाद FIR दर्ज कराई गई, जो कि मामले की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में मारपीट का आरोप होने के बावजूद, कथित घटना में किसी भी पक्ष को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी, जिसका मेडिकल रिपोर्ट में भी उल्लेख नहीं है।
बचाव पक्ष के वकील ने यह भी दावा किया कि घटना के कथित समय पर अधिवक्ता मोहम्मद जैन अपने घर पर ही मौजूद थे, जिसका पुख्ता सीसीटीवी फुटेज साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्तमान FIR के दर्ज होने के मात्र पांच दिन बाद, अम्माद हसन नामक व्यक्ति ने अपने कुछ अन्य साथियों के माध्यम से अधिवक्ता जैन के खिलाफ रंगदारी मांगने का एक और झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया है, जो स्पष्ट रूप से उन्हें फंसाने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
शिकायतकर्ता का आपराधिक इतिहास: अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान शिकायतकर्ता माबूद अहमद के आपराधिक इतिहास की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि माबूद अहमद एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कम से कम छह मुकदमे दर्ज हैं। वकील ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता हत्या के एक गंभीर मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए जाने के बावजूद फिलहाल जमानत पर बाहर है, जो उसकी आपराधिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
अतीक गैंग से संबंध का खंडन और वक्फ भूमि विवाद: अंत में, बचाव पक्ष ने जोर देकर कहा कि अधिवक्ता मोहम्मद जैन का कुख्यात अपराधी अतीक अहमद के किसी भी गिरोह या उसके सदस्यों से कोई संबंध नहीं है। यह पूरा मामला वक्फ की फर्जी जमीन पर कब्जा करने के एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसके तहत अधिवक्ता जैन को निशाना बनाकर झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है ताकि उन्हें जमीन हथियाने में बाधा न बने। सभी दलीलों और तथ्यों पर विचार करने के बाद, माननीय उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता मोहम्मद जैन को अग्रिम जमानत प्रदान करने का निर्णय लिया।