यूपी सरकार की 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ODOC) योजना में 'इलाहाबादी समोसा' शामिल, इन जिलों के लजीज व्यंजन भी बने शान

इलाहाबादी समोसे का ही क्यों हुआ चयन? जानें इसकी खासियत

यूपी सरकार की 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ODOC) योजना में 'इलाहाबादी समोसा' शामिल, इन जिलों के लजीज व्यंजन भी बने शान

रिपोर्ट: अनिल कुमार शर्मा | प्रयागराज न्यूज़ डिजिटल मीडिया

प्रयागराज | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के पारंपरिक और स्थानीय जायकों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए 'एक जनपद एक उत्पाद' (ODOP) की तर्ज पर 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC - One District One Cuisine) योजना की शुरुआत की है। हम इलाहाबादियों के लिए सबसे बड़ी और लजीज खुशखबरी यह है कि इस प्रतिष्ठित सूची में हमारे प्यारे 'इलाहाबादी समोसे' का चयन किया गया है।

प्रयागराज की पहचान सिर्फ गंगा-जमुना-सरस्वती के संगम से ही नहीं है, बल्कि यहां की गलियों में मिलने वाले खस्ता और मसालेदार समोसे से भी है। सुबह के नाश्ते से लेकर शाम की चाय तक, समोसा इलाहाबादियों के दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा है। अब राज्य सरकार की इस पहल से हमारा यह स्थानीय स्वाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी नई पहचान बनाएगा।

क्या है 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) योजना? उत्तर प्रदेश विभिन्न संस्कृतियों और खान-पान का संगम है। हर जिले का अपना एक खास स्वाद है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। ODOC योजना का मुख्य उद्देश्य इन पारंपरिक व्यंजनों को संरक्षित करना, उन्हें प्रमोट करना और इससे जुड़े छोटे कारीगरों, हलवाइयों और रसोइयों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

योजना के तहत चयनित व्यंजनों को जीआई टैग (GI Tag) दिलाने, उनकी पैकेजिंग को आधुनिक बनाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर काम किया जाएगा, ताकि इन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए देश-विदेश तक पहुंचाया जा सके।

इलाहाबादी समोसे के साथ यूपी के इन व्यंजनों का भी बजेगा डंका ODOC की इस स्वादिष्ट सूची में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के वे व्यंजन शामिल किए गए हैं, जो अपनी खासियतों के लिए पूरे भारत में जाने जाते हैं। इलाहाबादी समोसे के अलावा सूची में शामिल अन्य प्रमुख व्यंजन इस प्रकार हैं:

  • लखनऊ की रेवड़ी: नवाबों के शहर की कुरकुरी और मीठी रेवड़ी।

  • कानपुर के लड्डू: शहर की पहचान बन चुके खास स्वादिष्ट लड्डू।

  • बनारस का मलइयो: काशी के घाटों पर सर्दियों की शान 'मलइयो'।

  • आगरा का पेठा: ताज नगरी की सुप्रसिद्ध और विश्वविख्यात मिठाई।

  • बाराबंकी की चंद्रकला: चाशनी और खोए से लबालब खास मिठाई।

  • मेरठ की गजक: पश्चिमी यूपी की सर्दी का सबसे खास स्वाद।

  • बुलंदशहर की खुरचन: दूध की मलाई से बनने वाली मशहूर और पारंपरिक मिठाई।

  • फर्रुखाबाद की दालमोठ: तीखे और चटपटे स्नैक्स के शौकीनों की पहली पसंद।

  • मथुरा की माखन-मिश्री: कान्हा की नगरी का सबसे शुद्ध और पवित्र प्रसाद।

  • गोरखपुर का लिट्टी चोखा: पूर्वांचल के सबसे प्रमुख और पारंपरिक भोजन में से एक।

रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और कारीगरों को बेहतर वित्तीय प्रबंधन व एफएसएसएआई (FSSAI) सर्टिफिकेशन प्राप्त करने में सरकारी मदद मिलेगी। इसके अलावा, पर्यटन स्थलों पर इन व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे यूपी आने वाले पर्यटकों को प्रामाणिक और हाइजीनिक स्थानीय स्वाद चखने का मौका मिलेगा।

प्रयागराज के हलवाइयों और आम नागरिकों में इस घोषणा के बाद से ही भारी उत्साह है। इलाहाबादी समोसे का यह सफर अब सड़क किनारे की दुकानों से निकलकर ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है।