ट्रिपल आईटी में "समकालीन अनुप्रयोगों के लिए सैटेलाइट इमेज विश्लेषण" पर कार्यशाला का शुभारंभ
ट्रिपल आईटी में "समकालीन अनुप्रयोगों के लिए सैटेलाइट इमेज विश्लेषण" पर कार्यशाला का शुभारंभ
प्रयागराज, 29 जून । भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) इलाहाबाद में सोमवार को "समकालीन अनुप्रयोगों के लिए
सैटेलाइट इमेज विश्लेषण" विषय पर आयोजित तीसरी सप्ताहव्यापी कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को सैटेलाइट इमेज प्रोसेसिंग, रिमोट सेंसिंग तथा मशीन लर्निंग आधारित आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण प्रदान करना है।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. त्रिलोकी पंत ने उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि सैटेलाइट इमेज प्रोसेसिंग वर्तमान समय में अनुसंधान एवं विकास का अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और आज यह शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों तथा नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी तकनीक के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट इमेजिंग की सहायता से विशाल भौगोलिक क्षेत्रों की प्रभावी एवं सटीक निगरानी संभव हो पाती है। इसका उपयोग भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण मानचित्रण, वनों की कटाई का आकलन, शहरी क्षेत्रों के विस्तार का अध्ययन, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मानचित्रण, कृषि, जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा आपदा प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है।
डॉ. पंत ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अनेक सफल उपग्रह मिशनों के माध्यम से विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रत्येक वर्ष नए एवं उन्नत उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों ने देश में रिमोट सेंसिंग एवं भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के विकास को नई गति प्रदान की है।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनीष कुमार ने "मशीन लर्निंग के माध्यम से सैटेलाइट इमेज विश्लेषण के समकालीन अनुप्रयोग" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग तकनीकों ने सैटेलाइट चित्रों के विश्लेषण की प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक एवं प्रभावी बना दिया है।
प्रो. कुमार ने बताया कि मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों का उपयोग भूमि वर्गीकरण, फसल निगरानी, पर्यावरणीय परिवर्तन का विश्लेषण, प्राकृतिक आपदाओं के आकलन, शहरी नियोजन, स्मार्ट सिटी विकास तथा वस्तुओं की स्वचालित पहचान जैसे अनेक क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भू-स्थानिक डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है।
डॉ. के. पी. सिंह ने "डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग के मूल तत्व" विषय पर डिजिटल इमेज की मूल अवधारणाओं, इमेज अधिग्रहण, सैंपलिंग एवं क्वांटाइजेशन, इमेज एन्हांसमेंट, फ़िल्टरिंग, सेगमेंटेशन तथा फीचर एक्सट्रैक्शन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग की मजबूत समझ के बिना सैटेलाइट इमेज विश्लेषण के उन्नत अनुप्रयोगों को समझना संभव नहीं है।
ट्रिपल आईटी के पीआरओ डाॅ पंकज मिश्र ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के शोधार्थी, शिक्षक, स्नातकोत्तर विद्यार्थी एवं तकनीकी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। सप्ताह भर चलने वाली इस कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा रिमोट सेंसिंग, जीआईएस (GIS), सैटेलाइट इमेज प्रोसेसिंग, मशीन लर्निंग तथा भू-स्थानिक विश्लेषण से संबंधित व्याख्यान, प्रयोगात्मक सत्र एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।