शंकराचार्य के खिलाफ झूठा आरोप लगाने के कथित दबाव का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य मामले में यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट

शंकराचार्य के खिलाफ झूठा आरोप लगाने के कथित दबाव का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

प्रयागराज, 10 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की खंडपीठ ने शाहजहाँपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत दायर पूरक हलफनामा पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

न्यायालय ने शुक्रवार काे दाखिल किए गए अनुपूरक शपथपत्र को अभिलेख पर लेते हुए कार्यालय को उसे विधिवत क्रमांकित करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पाण्डेय को, उनका पूरा पता समेत, पिता का नाम एवं अन्य आवश्यक विवरण अंकित करते हुए, याचिका में प्रतिवादी (पक्षकार) के रूप में सम्मिलित करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित स्थाई अधिवक्ता को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक इंस्ट्रक्शन (रिपोर्ट) प्राप्त करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है तथा प्रकरण को नए वाद के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देशित किया है कि वह इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के बरेली परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक, शाहजहाँपुर के पुलिस अधीक्षक तथा थाना सदर बाजार, शाहजहाँपुर के थाना प्रभारी को क्रमशः बरेली एवं शाहजहाँपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों के माध्यम से आगामी 24 घंटे के भीतर प्रेषित करना सुनिश्चित करें।

रिट याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात व्यक्तियों ने पत्रकार रमाशंकर दीक्षित से संपर्क कर उन्हें धन का प्रलोभन दिया तथा कथित रूप से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध उनकी दो नाबालिग पुत्रियों के यौन शोषण का झूठा आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी गईं तथा उनके घर की कथित रूप से रेकी भी कराई गई।

याचिका के अनुसार, शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की, लेकिन सुरक्षा में लगाए गए कुछ पुलिसकर्मियों ने भी कथित रूप से याचिकाकर्ता पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस संबंध में विभिन्न प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को शिकायतें दिए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि याचिकाकर्ता की दो नाबालिग पुत्रियाँ हैं और पूरे परिवार की सुरक्षा खतरे में है। इसी आधार पर न्यायालय से याचिकाकर्ता एवं उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आवश्यक विधिक संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है।