एटा में भीषण गर्मी में पेयजल आपूर्ति के लिए नगर पालिका ने किये पुख्ता इंतजाम
जलेसर कस्बे के लिए भी 141 करोड़ की पेयजल योजना का टेंडर 28 अप्रैल को
एटा, 26 अप्रैल । उत्तर प्रदेश के एटा जिले में नगर पालिका एटा ने अपनी नगरीय सीमा के अंतर्गत नागरिकों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए कमर कस ली है। वाटर कूलर, आरओ वाटर कूलर, वाटर टैंकर के साथ-साथ अब नगर पालिका का जलकल विभाग चौराहों पर प्याऊ भी लगाएगा।
अप्रैल महीने में ही तापमान 42 डिग्री से ऊपर चल रहा। ऐसे में पीने के पानी की आवश्यकता सर्वाधिक है। आगामी दिनों में गर्मी के और बढ़ने से पेयजल आपूर्ति की मांग और आवश्यकता बढ़ने की पूरी उम्मीद है, इसे देखते हुए नगर पालिका एटा ने शुद्ध एवं निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए समुचित व्यवस्थाएं की है। नगर पालिका एटा ने नगरीय सीमा के अंतर्गत पांच आरओ वाटर कूलर, 25 वाटर कूलर लगाये जा चुके हैं। इसके साथ-साथ वैकल्पिक और आकस्मिक व्यवस्था के रूप में आवश्यकता अनुसार पीने के पानी के टैंकर की भी व्यवस्था की गई है, जो मांग के अनुरूप विभिन्न स्थानों पर भेजे जाएंगे।
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका एटा निहाल सिंह ने रविवार को बताया कि चलते-फिरते राहगीरों, यात्रियों, कचहरी के वादकारियों और देहात क्षेत्र से खरीदारी करने आए ग्रामीण आदि को इस तपती गर्मी में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सोमवार से 5 स्थान पर प्याऊ की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जनता दुर्गा मंदिर पाठक होटल के पास, तहसील, कचहरी चौराहा, घंटाघर और नन्नूमल चौराहा स्थान चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा कई जगह पर पहले से वाटर कूलर लगे हैं उन स्थानों पर भी व्यवस्था की गई है।
जलकल प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि प्याऊ की व्यवस्था में बड़े ड्रमों में शीतल जल रखा जाएगा। कुछ स्थानों पर टोंटी लगे हुए वॉटर टैंकर भी भेजे जाएंगे। इन टैंकरों की व्यवस्था टैंकर
वाहन प्रभारी मनोज कुमार द्वारा की जाएगी।
जनपद एटा के कुछ स्थानों पर खारे पानी के साथ-साथ जलस्तर काफी नीचे चले जाने के कारण पेयजल की बड़ी समस्या बनी हुई है, यह हालत एटा के जलेसर कस्बे में ज्यादा हैं। हालांकि जल निगम ने आगामी दिनों में जलेसर के लिए 141 करोड़ की पेयजल योजना का टेंडर 28 अप्रैल को खोला जाएगा।
अधिशासी अभियंता जल निगम तारिक़ अली ने बताया कि पेयजल आपूर्ति के लिए टेंडर खुलने के बाद निर्धारित कार्यदाई संस्था को काम सौंप कर पाइपलाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने का काम किया जाएगा। काम पूरा होने के बाद करीब 20 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा।