श्रावण मास के अंतिम सोमवार को प्रयागराज में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
बाढ़ भी न डिगा सकी भक्तों की श्रद्धा
प्रयागराज, 4 अगस्त : प्रयागराज में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट आस्था का विहंगम दृश्य देखने को मिला। गंगा और यमुना नदियों के प्रचंड वेग से उफान पर होने और शहर के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति के बावजूद, शिवभक्तों का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। सोमवार भोर से ही शिव मंदिरों में देवों के देव महादेव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ "बम-बम भोलेनाथ" और "हर-हर महादेव" के जयघोष आसमान को चीरते हुए गूंजायमान हो रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
जलमग्न घाटों के बावजूद अडिग श्रद्धा: पतित पावनी मां गंगा और यमुना, जो अपने उफान पर हैं, ने प्रयागराज के कई प्रसिद्ध घाटों को अपनी आगोश में ले लिया है। दशाश्वमेध घाट पर स्थित प्राचीन ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियां पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे मंदिर तक पहुंचना अपने आप में एक चुनौती बन गया है। इसके बावजूद, बाबा भोले के भक्त अपनी जान की परवाह किए बिना, कमर तक या गर्दन तक पानी में डूबकर भी भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। यह दृश्य भक्तों की महादेव के प्रति अद्वितीय निष्ठा और अटूट श्रद्धा का प्रमाण है।
विविध मंदिरों में उमड़ा भक्तों का रेला: ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर के अतिरिक्त, प्रयागराज के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी सोमवार भोर से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। ऐतिहासिक नागवासुकी मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, ललितेश्वर महादेव मंदिर, मनकामेश्वर महादेव मंदिर, पांडेश्वर महादेव मंदिर, फूटा हवन महादेव मंदिर, नरकेश्वर महादेव मंदिर, तक्षक मंदिर और बेणी माधव मंदिर जैसे सभी छोटे-बड़े शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कांवरिये, जो अपनी कठिन यात्रा पूरी कर पवित्र गंगाजल लेकर पहुंचे थे, भी उत्साहपूर्वक जलाभिषेक कर रहे थे। मंदिरों के भीतर घंटियों की ध्वनि, मंत्रों का उच्चारण और धूप-पुष्पों की सुगंध एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान कर रही थी।
सुरक्षा के व्यापक प्रबंध: इस विशाल जनसैलाब और बाढ़ की विषम परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कांवड़ यात्रियों और सामान्य भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। इसके अलावा, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जल पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें भी मुस्तैदी से लगी हुई हैं। ये टीमें घाटों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रख रही हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
श्रावण मास के इस अंतिम सोमवार को महादेव के प्रति भक्तों का यह अदम्य उत्साह, दृढ़ संकल्प और श्रद्धा प्रयागराज की आध्यात्मिक पहचान को एक बार फिर रेखांकित करता है। बाढ़ की चुनौतियों के बावजूद आस्था का यह प्रदर्शन सचमुच प्रेरणादायक है।