लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, तीन संदिग्ध शेल कंपनियों से जुड़े 135 बैंक खाते फ्रीज, 204 करोड़ रुपये जब्त
लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, तीन संदिग्ध शेल कंपनियों से जुड़े 135 बैंक खाते फ्रीज, 204 करोड़ रुपये जब्त
लखनऊ, 18 जुलाई । देश में वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज़ करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान के तहत, ईडी ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विभिन्न शहरों – लखनऊ, नोएडा, रोहतक और गुरुग्राम – में सघन छापेमारी की है। इन छापों के परिणामस्वरूप, तीन संदिग्ध शेल कंपनियों से जुड़े कुल 135 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन फ्रीज किए गए खातों से लगभग 204 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई है, जो कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई 'अपराध आय' (Proceeds of Crime - POC) है।
ईडी ने स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कार्रवाई की पुष्टि की है। निदेशालय के चंडीगढ़ आंचलिक कार्यालय द्वारा यह तलाशी अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act - PMLA), 2002, के कड़े प्रावधानों के तहत चलाया गया था।
यह विशेष अभियान 4 जुलाई को शुरू किया गया था, जिसका मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ में स्थित तीन संदिग्ध शेल कंपनियां थीं। ये कंपनियां मेसर्स किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से चल रही थीं। शेल कंपनियां अक्सर ऐसी व्यावसायिक इकाइयाँ होती हैं जिनका कोई वास्तविक व्यापारिक संचालन नहीं होता और इनका उपयोग अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी या अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों के लिए किया जाता है।
तलाशी अभियान के दौरान, ईडी के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेज बरामद किए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न बैंकों से प्राप्त पुष्टियों और वित्तीय लेनदेन के गहन विश्लेषण के आधार पर, निदेशालय ने इन संदिग्ध संस्थाओं से जुड़े 135 बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्णय लिया। इन खातों में जमा कुल 204 करोड़ रुपये की राशि को 'अपराध आय' मानते हुए जब्त कर लिया गया है।
ईडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई एक बड़ी और चल रही जांच का हिस्सा है। निदेशालय के अनुसार, इस विशिष्ट मामले में अब तक कुल 391 करोड़ रुपये की अपराध आय को फ्रीज किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह नेटवर्क काफी विस्तृत हो सकता है और इसमें अन्य वित्तीय अपराध भी शामिल होने की संभावना है।
यह कार्रवाई भारत में वित्तीय अपराधों, विशेषकर मनी लॉन्ड्रिंग और शेल कंपनियों के दुरुपयोग, पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ईडी का यह कदम ऐसे अवैध वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने और देश की अर्थव्यवस्था को स्वच्छ रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। जांच अभी भी जारी है, और आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियां या संपत्ति की कुर्की देखी जा सकती है।