परम्पराओं को तोड़ना अनैतिक, धर्म में आस्था न रखने वाले छोड़ दें धार्मिक नगरी: अधोक्षजानंद देवतीर्थ

योगी आदित्यनाथ को गाली देना वाला संत नहीं, देश व सनातन विरोधी: शंकराचार्य बसंत पंचमी के पर्व माघ मेला में मनाया गया शंकराचार्य का 31वां पीठारोहण समारोह

प्रयागराज, 23 जनवरी । गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने कहा कि विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगरी प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या को जो हुआ वह कटु निंदनीय है। वर्षों से चली आ रही माघ मेले की परम्पराओं को तोड़ने वाला संत नहीं हो सकता। जिन्हें धर्म में आस्था एवं प्रेम नहीं है, ऐसे लोगों को धार्मिक क्षेत्र में नहीं आना चाहिए।

शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद महाराज शुक्रवार को बसंत पंचमी के मौके पर आयोजित शंकराचार्य के 31वें पीठारोहण समारोह के बाद माघ मेला क्षेत्र के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन संगम के तट करोड़ों श्रद्धालुओं को दबाव के बीच पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षित स्नान करने में जुटे हुए थे, लेकिन इसी बीच सभी परम्पराओं को तोड़ते अपने शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर धर्म के ज्ञानी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज पहुंचते हैं। वहां जाे कुछ हुआ ऐसा माघ मेले के इतिहास में नहीं हुआ। शंकराचार्य ने कहा कि हमें तो ऐसा लगता है कि इन्हें धार्मिक क्षेत्र एवं धर्म से कोई सरोकार ही नहीं है। जिन्हें धर्म से कोई मतलब नहीं है वह ऐसे स्थानों न जाए। माघ मास में जहां सभी संत एवं कल्पवासी आध्यामिक ज्ञान की खोज में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर सनातन धर्म को देश एवं दुनिया में ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले नरेन्द्र मोदी एवं उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धार्मिक क्षेत्र में बैठ कर गालियां देने वाले अविमुक्तेश्वरानंद संत नहीं हैं। देश एवं सांस्कृतिक विरासत का विरोध करने वाले गिरोह के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं।

स्वामी अधोक्षजानंद महाराज ने कहा कि हमारा कहना है कि आप की वाणी धर्मगुरु के समान नहीं है। मेरी प्रशासन से मांग है कि सनातन एवं धर्म का विरोध करने वाले गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाय और ऐसे लोगों का धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाय। मैं चेतावनी देता हूं कि धर्म विरोधी सुधर जाए, नहीं तो धार्मिक क्षेत्र छोड़कर चले जाय। धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों में अवरोध उत्पन्न न करें।

आज बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शंकराचार्य का 31वांपीठारोहण समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस उपलक्ष्य में माघ मेला त्रिवेणी रोड स्थित शिविर में तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान भी शुरू हुआ। साधुसंत दण्डी स्वामी एवं श्रद्धालुओं ने आद्य शंकराचार्य पादुकाओं का पूजन किया। तदुपरांत वर्त्तमान शंकराचार्य का पूजन एवं फूलमाला अंगवस्त्र भेंटकर आशीर्वाद लिया। अर्धकुम्भ मेला प्रयागराज 1995 में परमपूज्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज को संतों विद्वानों ने परम्परानुसार तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजनदेव तीर्थ जी महाराज के इच्छानुसार गोवर्धन मठ के 145 वें शंकराचार्य के रुप में अभिषिक्त किया।