अनिरुद्धाचार्य देश का माहौल बिगाड़ रहे है: प्रिया सरोज का आरोप, 'शूद्र' विवाद के बाद गरमाई राजनीति
अनिरुद्धाचार्य देश का माहौल बिगाड़ रहे है: प्रिया सरोज का आरोप, 'शूद्र' विवाद के बाद गरमाई राजनीति
जौनपुर, 18 जुलाई । मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच 'शूद्र' शब्द की परिभाषा और धार्मिक मान्यताओं को लेकर शुरू हुई बहस अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद में बदल गई है। हाल ही में इस पर हुई गरमागरम बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस वीडियो और उसके बाद उपजे घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी की नेता और जौनपुर के मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर देश का माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रिया सरोज का आरोप: 'छवि सुधारने के लिए हिंदू-मुस्लिम का सहारा' सपा सांसद प्रिया सरोज ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का एक वीडियो साझा करते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। प्रिया सरोज ने अपने ट्वीट में स्पष्ट शब्दों में लिखा है, "जब एक बाबा (अनिरुद्धाचार्य) कृष्ण जी का नाम बताने में असफल हो जाता है, तो अपनी डूबती छवि को सुधारने के लिए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष (अखिलेश यादव) का नाम हिंदू-मुस्लिम से जोड़कर देश-प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास करता है।" उन्होंने आगे कटाक्ष करते हुए सवाल उठाया है कि, "क्या यही सब ये (अनिरुद्धाचार्य) अपने प्रवचन में सिखाते हैं?" प्रिया सरोज ने कथावाचक पर उनके धार्मिक मंच का उपयोग राजनीतिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए करने का आरोप लगाया है, जिससे उनके प्रवचनों की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सपा सांसद ने जिस 37 सेकेंड के वीडियो को अपलोड करके यह सवाल खड़ा किया है, वह अनिरुद्धाचार्य के उस बयान का अंश है जिसमें वे अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दे रहे हैं।
अनिरुद्धाचार्य का पलटवार: 'राजधर्म नहीं संतों से भेदभाव' इस पूरे विवाद में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपने ऊपर लगे आरोपों, विशेषकर अखिलेश यादव के बयानों का करारा जवाब दिया है। अपने भक्तों के सामने दिए गए एक प्रवचन में अनिरुद्धाचार्य ने सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “एक नेता ने मुझसे भगवान का नाम पूछा था, जबकि हमने कहा कि भगवान के नाम अनंत हैं। मगर शायद उन्हें अपनी मन-मुताबिक़ उत्तर चाहिए था। जब उन्हें वह उत्तर नहीं मिला तो वे कहने लगे कि 'हमारा रास्ता अलग है', 'आपका रास्ता अलग है'?" अनिरुद्धाचार्य ने इस पर भावनात्मक लहजे में सवाल उठाते हुए कहा, "क्या कोई माँ अपने बेटे से यही कहती है कि तेरा रास्ता अलग है?"
उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री पद पर रहने का हवाला देते हुए तंज कसा, "जो व्यक्ति मुख्यमंत्री रह चुका है, वो मुझे कहता है कि हम अलग हैं, आप अलग हैं।" कथावाचक ने शासक के धर्म ('राजधर्म') पर सवाल उठाते हुए कहा, "अगर राजा में ही अपनी प्रजा के लिए प्रेम नहीं है तो वह कैसा शासक है? मैं तो वही कहूंगा जो सच है।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि "किसी भी धर्माचार्य या सनातन परंपरा से मनचाहा उत्तर की अपेक्षा रखना और न मिलने पर उसे अलग-थलग करना 'राजधर्म' नहीं है।" अनिरुद्धाचार्य का यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की नियत और उनके शासनकाल के दौरान अपनाए गए रवैये पर सवाल खड़े करता है।
'मुसलमानों से नहीं कहते, तो फिर संतों से क्यों भेदभाव?' अनिरुद्धाचार्य ने अखिलेश यादव पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “अखिलेश यादव मुसलमानों से यह नहीं कहते कि तुम्हारा रास्ता अलग है, मेरा अलग है। बल्कि वे तो उनसे कहते हैं कि जो तुम्हारा रास्ता है वही हमारा है।" इस तुलना के माध्यम से उन्होंने अखिलेश यादव पर हिंदू संतों और सनातन परंपरा के प्रति पूर्वाग्रह रखने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया, "तो फिर संतों और सनातन परंपरा से क्यों भेदभाव किया जा रहा है? क्या यह समाज को जोड़ने का कार्य है?" अनिरुद्धाचार्य के इन बयानों ने विवाद को और गहरा कर दिया है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर अखिलेश यादव की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और उन पर एक समुदाय विशेष के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
इस बढ़ते विवाद में सपा सांसद प्रिया सरोज से दूरभाष पर बात करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा, जिससे उनके नवीनतम पक्ष अभी सामने नहीं आ सका है। यह विवाद लगातार गरमा रहा है और इसके राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर गहरे निहितार्थ हो सकते हैं, जो आगामी चुनावों में भी एक अहम मुद्दा बन सकता है।