संगम नगरी में बिजली विभाग की बदहाली: एक तरफ मौत का मातम, दूसरी तरफ टावर पर 'शोले' वाला ड्रामा

"लापरवाही की बलि चढ़ा एक बेगुनाह, तो निलंबन के विरोध में टावर पर चढ़ा तंत्र"

संगम नगरी में बिजली विभाग की बदहाली: एक तरफ मौत का मातम, दूसरी तरफ टावर पर 'शोले' वाला ड्रामा

प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में इन दिनों बिजली विभाग की कार्यप्रणाली चर्चाओं के केंद्र में है। एक ही विभाग से जुड़ी दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता को भी तार-तार कर दिया है। एक ओर झूंसी में विभाग की लापरवाही ने एक गरीब परिवार की खुशियाँ छीन लीं, तो दूसरी ओर जार्ज टाउन में एक अवर अभियंता (JE) का 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' विभाग की कार्यशैली की कलई खोल रहा है। क्या बिजली विभाग में सब कुछ ठीक है? क्या निर्दोषों को सज़ा और दोषियों को संरक्षण मिल रहा है? देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट।

झूंसी का दर्द: लापरवाही ने छीन लिया परिवार का इकलौता सहारा

मंगलवार का दिन झूंसी इलाके के लिए अमंगल साबित हुआ। 28 वर्षीय रामू कुशवाहा, जो अपनी मेहनत-मजदूरी के दम पर अपनी पत्नी और एक छोटे बच्चे का भरण-पोषण कर रहा था, अब इस दुनिया में नहीं है। परिजनों का आरोप है कि बिजली विभाग की अमानवीय कार्यशैली और लाइनमैन की जानलेवा लापरवाही ने रामू की बलि ले ली।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिना उचित शटडाउन लिए रामू को खंभे पर चढ़ाया गया और उसी दौरान बिजली की सप्लाई चालू हो गई। करंट की चपेट में आते ही रामू की दर्दनाक मौत हो गई। आक्रोशित परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस लाइनमैन ने रामू को काम पर लगाया था, उसकी लापरवाही के कारण पूर्व में भी एक मजदूर की जान जा चुकी है, लेकिन विभाग ने आज तक कोई सबक नहीं लिया।

जार्ज टाउन का 'शोले' ड्रामा: सस्पेंशन के खिलाफ टावर पर जेई

झूंसी की इस दर्दनाक घटना के बाद विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पहले सरकारी लाइनमैन रमेश को सस्पेंड किया और फिर अवर अभियंता (JE) अभय यादव को निलंबित कर दिया। निलंबन की यह कार्रवाई अभय यादव को नागवार गुजरी और उन्होंने 'शोले' फिल्म के वीरू की तर्ज पर जार्ज टाउन स्थित बिजली विभाग के आफिस में लगे ऊंचे टावर पर चढ़कर सबको हिला कर रख दिया।

बृहस्पतिवार की शाम जैसे ही जेई टावर पर चढ़े, विभाग में हड़कंप मच गया। रात के आठ बज चुके थे, लेकिन जेई नीचे उतरने को तैयार नहीं थे। नीचे पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और बिजली विभाग के आला अफसर खड़े होकर मिन्नतें कर रहे थे, लेकिन टावर के ऊपर से जेई के तेवर सख्त थे। वे बार-बार अपनी जान देने की धमकी दे रहे थे और न्याय की गुहार लगा रहे थे।

"जांच के बिना सस्पेंशन मंजूर नहीं"

टावर पर चढ़े जेई अभय यादव ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना हुई, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन बिना किसी स्पष्टीकरण और निष्पक्ष जांच के, सिर्फ खानापूर्ति के लिए मुझे सस्पेंड कर दिया गया। विभाग में सस्पेंशन के बाद 'सरेंडर' का जो आदेश दिया जाता है, वह किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है। मैं चाहता हूँ कि निलंबन रद्द हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। अगर मैं दोषी पाया गया, तो मुझे सजा मिले, लेकिन एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

व्यवस्था पर बड़ा सवाल

जहाँ एक तरफ झूंसी में एक परिवार सड़कों पर न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही अधिकारी के इस 'टावर सत्याग्रह' ने विभागीय अनुशासन और कार्यप्रणाली पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

क्या बिजली विभाग में सुरक्षा मानकों का मजाक उड़ाया जा रहा है? क्या बिना जांच के निलंबन की तलवार लटकाना ही विभाग की एकमात्र नीति है? झूंसी कांड के बाद पुलिस की जांच जारी है, लेकिन यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि क्या बिजली विभाग की ये घटनाएं केवल आंकड़े बनकर रह जाएंगी या फिर विभाग अपनी कार्यप्रणाली में कोई ठोस सुधार लाएगा?