जीएसटी से देश की जटिल कर व्यवस्था हुई सरल और पारदर्शी : प्रो नागेश्वर राव
--जीएसटी से पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली स्थापित: प्रो आलोक राय --मुविवि में जीएसटी 2.0 सुधारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
प्रयागराज, 08 मई । उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में भारत सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 सुधारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार को मुक्त विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि देश के जाने-माने प्रबंध शास्त्री एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि जीएसटी ने भारत की कर प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की है और वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा को साकार किया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी 1.0 और जीएसटी 2.0 के माध्यम से देश की जटिल कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटलीकरण के समावेश से राजस्व प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं सुगम हुआ है, जिससे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी वित्तीय संचालन में अत्यधिक सुविधा प्राप्त हो रही है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की कर दरें मेरिट आधारित हैं, जिसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं को कर राहत अथवा शून्य कर का लाभ दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं, उत्पादकों तथा सरकार सभी को लाभ प्राप्त हो रहा है और महंगाई नियंत्रण के साथ सरकारी आय में भी वृद्धि हो रही है। प्रो. राव ने विकसित भारत/2047 की परिकल्पना पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य के चार प्रमुख स्तंभ गरीब, महिलाएं, युवा और किसान हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत विश्व की दूसरी या तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है तथा प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकसित भारत की यह संकल्पना केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने अधिकारों से कर्तव्यों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति के वसुधैव कुटुम्बकम् सिद्धांत को रेखांकित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों के बीच संबंध केवल औपचारिक न होकर परिवार जैसा स्नेहपूर्ण होना चाहिए।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता के निदेशक प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने कहा कि भारत की कर प्रणाली ने समय के साथ एक लम्बी और महत्वपूर्ण यात्रा तय की है। पहले देश में सेल्स टैक्स लागू था, जिसे बाद में कमर्शियल टैक्स और फिर वैट प्रणाली में परिवर्तित किया गया। अंततः पूरे देश में एक समान और सरल कर व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से वस्तु एवं सेवा कर लागू किया गया। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले देश में विभिन्न प्रकार के कर और राज्यों के बीच चेक-पोस्ट व्यवस्था थी, जिसके कारण व्यापार और परिवहन में काफी समय और लागत लगती थी। जीएसटी ने इन बाधाओं को समाप्त कर पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली स्थापित की, जिससे व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों को सुविधा मिली।
प्रोफेसर राय ने कहा कि प्रारंभ में यह आशंका थी कि जीएसटी लागू होने से राज्यों के राजस्व में कमी आ सकती है, लेकिन इसके विपरीत जीएसटी संग्रह में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि मार्च 2024 में जीएसटी संग्रह लगभग 2.01 लाख करोड़ और अप्रैल 2024 में लगभग 2.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह प्रतिवर्ष लगभग 8 से 9 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जीएसटी संग्रह में आज भी अग्रणी राज्य है और कुल संग्रह में लगभग 10-12 फीसदी का योगदान देता है। वहीं उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में तीसरे या चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।
विशिष्ट अतिथि उपायुक्त, जीएसटी, लखनऊ दिव्येंदु शेखर गौतम ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था एक जटिल, कागज़ी एवं मैनुअल प्रणाली से विकसित होकर अब तकनीक-आधारित, पारदर्शी और सरल कर व्यवस्था बन चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2021 से जीएसटी प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग प्रारम्भ किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027-28 तक जीएसटी प्रणाली को वॉयस-इंटरैक्टिव सहायता प्रणाली सिरी एवं अलेक्सा की तरह से जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे करदाता बिना त्रुटि के कार्य कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 तीन प्रमुख स्तंभों सरलता, पारदर्शिता एवं विश्वास पर आधारित है। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसे सामान्य कम्प्यूटर ज्ञान रखने वाला भी आसानी से समझ सके।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि जीएसटी केवल एक कर प्रणाली नहीं, बल्कि संविधान में निहित कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को साकार करने का प्रभावी माध्यम है। डिजिटलीकरण और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था के कारण कर संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता आई है तथा राजस्व रिसाव में उल्लेखनीय कमी हुई है। उन्होंने कहा कि कर दरों में कमी के बावजूद कर संग्रह में निरंतर वृद्धि देश की आर्थिक सुदृढ़ता को दर्शाती है। कुलपति ने कहा कि जीएसटी को सामान्यतः वाणिज्य एवं प्रबंधन विषय तक सीमित समझा जाता है, जबकि इसका सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं आर्थिक जीवन पर व्यापक प्रभाव है। मुक्त विवि के मीडिया प्रभारी डॉ प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि संगोष्ठी की रूपरेखा संयोजक प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ साधना सिंह की पुस्तक का विमोचन अतिथियों ने किया। सेमिनार के छह तकनीकी सत्रों में देश भर के 10 राज्यों से 520 प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन 06 तकनीकी सत्रों में प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञ प्रो लवकुश मिश्रा, प्रो शैलेंद्र कुमार, सीए सुमित अग्रवाल, डॉ नीरज शुक्ला, डॉ एस टी जोसेफ, डॉ रेजिना जॉन, प्रो मानस पांडेय, डॉ ए सी पांडेय, डॉ अंजनी कुमार, प्रो विनोद कुमार पांडेय, डॉ ऋचा सिन्हा, डॉ हिमांशु कुमार पांडेय, प्रो माधवेंद्र मिश्रा, डॉ प्रदीप कुमार सिंह, राहुल चटर्जी, डॉ अवधेश कुमार गुप्ता, डॉ श्रुतिका मिश्रा, डॉ अभय पांडेय, डॉ सुधीर शर्मा तथा डॉ बी बी अग्रवाल ने अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए।