एस आर एन अस्पताल में बुजुर्ग मरीज को मिली राहत, नई तकनीक से टला घुटना प्रत्यारोपण
एस आर एन अस्पताल में बुजुर्ग मरीज को मिली राहत, नई तकनीक से टला घुटना प्रत्यारोपण
प्रयागराज, 24 जुलाई । स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय, प्रयागराज के अस्थि रोग विभाग में 67 वर्षीय बुजुर्ग राम अशीष सिंह का सफल ऑपरेशन कर घुटना प्रत्यारोपण से बचा लिया गया। मरीज कई वर्षों से घुटनों के तेज़ दर्द और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रहे थे। यह जानकारी गुरुवार को डॉ. आनंद कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटनों की जॉइंट घिसाव) की समस्या थी, जिसमें सामान्यत: बुजुर्गों को नी रिप्लेसमेंट की सलाह दी जाती है।
चिकित्सकों ने घुटना बचाने के उद्देश्य से उच्च टिबियल ऑस्टियोटॉमी एचटीओ नामक आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। यह ऑपरेशन एमआईपीओ (न्यूनतम इनवेसिव प्लेट ऑस्टियोसिंथेसिस) तकनीक से किया गया, जिसमें बहुत ही छोटे चीरे के माध्यम से प्लेट फिक्सेशन किया जाता है। इस प्रक्रिया में रक्तस्राव बहुत कम होता है, मांसपेशियों को नुकसान नहीं होता और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है।
ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि एचटीओ तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए कारगर है, जिनमें घुटने का आंशिक क्षरण हुआ होता है। इससे मरीज के अपने घुटने को वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और नी रिप्लेसमेंट की आवश्यकता टाली जा सकती है। इस केस में हमने एमआईपीओ तकनीक का उपयोग कर ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।"
एचटीओ जैसी तकनीकें जॉइंट प्रिजर्वेशन में मील का पत्थर साबित हो रही हैं: डॉ.वी.के.पांडेय
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडेय ने इस सफल ऑपरेशन पर खुशी जताते हुए कहा कि हमारा प्रयास है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अत्याधुनिक सर्जरी तकनीकों की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। एचटीओ जैसी तकनीकें जॉइंट प्रिजर्वेशन में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। इससे मरीजों को लंबे समय तक चलने-फिरने में राहत मिलती है और जीवनस्तर बेहतर होता है।" बताया कि मरीज के एक्स-रे में वेरस विकृति (घुटनों का झुकाव) स्पष्ट था, जिससे चलने में दर्द और असंतुलन था। ऑपरेशन के बाद अब मरीज की हालत स्थिर है और उन्हें जल्द ही डिस्चार्ज किया जाएगा।