दाखिल-खारिज मामलों में देरी पर हाईकोर्ट अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराज
--कहा, फ़ाइलों को दबाकर बैठना और अदालती आदेशों की अनदेखी बर्दास्त नहीं किया जाएगा
प्रयागराज, 11 मई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दाखिल खारिज के मामलों में हो रही अत्यधिक देरी और अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फाइलों को दबाकर बैठना और अदालती आदेशों की अनदेखी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने धनंजय कुमार यादव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में दाखिल खारिज की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
प्रयागराज की सोरांव तहसील के नायब तहसीलदार रहे धनंजय कुमार यादव ने लगभग एक साल तक फाइल को जानबूझ कर रोके रखा। कोर्ट ने पाया कि अधिकारी ने लगभग एक साल तक फाइल को जानबूझ कर रोके रखा। कोर्ट ने तबादले के कारण आदेश का पालन नहीं होने के स्पष्टीकरण को केवल एक बहाना माना। साथ ही टिप्पणी की कि प्रमुख सचिव द्वारा जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को प्रक्रिया तेज करने के सर्कुलर जारी किए जाने के बावजूद न्यायालय में म्यूटेशन से जुड़े मामलों की बाढ़ आ रही है।
कोर्ट ने नायब तहसीलदार को 26 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश देते हुए वर्तमान तैनाती स्थल हंडिया में लंबित मामलों और उनके द्वारा किए गए निपटारे का पूरा विवरण देने का निर्देश दिया है।